तेरे साथ का ही असर है मेरे हमराह ये .... हम खड़े रहे मंज़िलें ही चल के आ गई
पास तुम नहीं मगर महसूस तुमको कर लिया.... जबकि मुझको छेड़ हवा ये इतरा गई
हों जुदा जुदाई से ये तेरे मेरे रात दिन..... मेरी हर नमाज़ रब को ये दुआ सुना गई
साथ तेरा मेरा भला नज़्म से कहाँ था कम..... आज ये तन्हाई भी नगमा नया सुना गई